श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 2 || Sri Sai Satcharita
श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 2 ग्रन्थ लेखन का ध्येय , कार्यारम्भ में असमर्थता और साहस , गरमागरम बहस , अर्थपूर्ण उपाधि हेमाडपन्त , गुरु की आवश्यकता । -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- गत अध्याय में ग्रन्थकार ने अपने मौलिक ग्रन्थ श्री साई सच्चरित्र ( मराठी भाषा ) में उन कारणों पर प्रकाश डाला था , जिननके दृारा उन्हें ग्रन्थरतना के कार्य को आरन्भ करने की प्रेरणा मिली । अब वे ग्रन्थ पठन के योग्य अधिकारियों तथा अन्य विषयों का इस अध्याय ...